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kaavya manjari

Friday, March 22, 2013

होली गीत..................


गाँव हमारो वृन्दावन है |
प्यारी-प्यारी चितवन ,
न्यारी-न्यारी छुअन |
रंग में ढल जाए ,
खिल जाए... सारो उपवन |

गलियां-गलियां गोरी |
मुरली धुन पर नाचे गुजरी....
हो नाचे गुजरी, भर-भर अंजुरी...
होली खेले सखी री... |

रंग-गुलाल उड़ाए सखी री,
वो गाए फ़ाल्गुनी|
झम -झम झूमे गुजरी,
रंग-रंग में छिप जाए,
मोहे रिझाए सजनी |


रिझाए....
गोरी की मटकन ,
कमरिया लचकन,
छहरीली लटकन ,
खो जाए मेरी धड़कन |  
 मैं आऊँ बार-बार मधुवन ...
रंगों में रम जाऊँ ;
अबीर उड़ाऊँ भर भर अंजुरी...
मैं भी खेलूँ होली... संग गुजरी.....


गुजरी(गुजरिया)-नारी फ़ाल्गुनी=होली गीत..................................

4 comments:

  1. bahut sundar holi geet likha hai :-)

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  2. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

    आर्यावर्त

    आर्यावर्त में समाचार और आलेख प्रकाशन के लिए सीधे संपादक को editor.aaryaavart@gmail.com पर मेल करें।

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  3. बढ़िया कविता |

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  4. bahut achhi prastuti, meri hardik shubha kamanaye aapko.aap aise hi nirantar aur kuchh achha likhne ki koshish karate rahe

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