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kaavya manjari

Wednesday, April 17, 2013

श्रृंगार को.............

श्रृंगार को वो हथियार बना के चल दिए ...
 अंगार को वो यार बना के चल दिए...
 छिपा के असली पहचान अपनी...
 दिल के दरवाजे पर एक प्रहार कर के चल दिए ...
....

7 comments:

  1. सुंदर एवं भावपूर्ण रचना...

    आप की ये रचना 19-04-2013 यानी आने वाले शुकरवार की नई पुरानी हलचल
    पर लिंक की जा रही है। सूचनार्थ।
    आप भी इस हलचल में शामिल होकर इस की शोभा बढ़ाना।

    मिलते हैं फिर शुकरवार को आप की इस रचना के साथ।

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  2. लाजवाब !!!

    कभी यहाँ भी पधारें और लेखन भाने पर अनुसरण अथवा टिपण्णी के रूप में स्नेह प्रकट करने की कृपा करें |
    Tamasha-E-Zindagi
    Tamashaezindagi FB Page

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  3. .भावात्मक अभिव्यक्ति ह्रदय को छू गयी आभार नवसंवत्सर की बहुत बहुत शुभकामनायें कौन मजबूत? कौन कमजोर ? .महिला ब्लोगर्स के लिए एक नयी सौगात आज ही जुड़ें WOMAN ABOUT MANजाने संविधान में कैसे है संपत्ति का अधिकार-1

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  4. बहुत खूब ... दिल पे प्रहार श्रृंगार से हो होता है ...

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  5. बहुत सुन्दर!!
    पधारें बेटियाँ ...

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    1. This comment has been removed by the author.

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