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kaavya manjari

Saturday, January 17, 2015

उड़ी पतंग अरमानों की.......................


उड़ी पतंग अरमानों की...... वो नील गगन आनंदित है
उन्मुक्त उमंग तूफ़ानों की. वो वेग पवन आह्लादित है

निर्बोध सही उन बच्चों सा  अंगारों का मर्दन करना है
सखी बनूँ   उड़ानों की वो सुरभित सुमन उल्लासित है 

2 comments:

  1. क्या बात है आपकी इन पंक्तियों में उड़ान, उम्मीद और हौसले का बहुत सुंदर मेल दिखता है। अरमानों की पतंग और नीले गगन का चित्र मन में तुरंत उतर जाता है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.

    अधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
    धन्यवाद!

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